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प्रकृति प्रेम कृष्ण प्राण जननी समान ही प्रकृति मुक्त उजाड़ पापों हिंदी कविता कृषक नारद रूप करती शुभता का सतत् योग करके मानव प्रकृति को अक्षुण्ण बनाना है माया हूं ऐश्वर्या बच्चों में जगाना है खबरदार

Hindi रौद्र रूप भी धारण करती Poems